सूरह 30 · जुज़ 21
Ar-Rum · 30:7
يَعْلَمُونَ ظَاهِرًا مِنَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَهُمْ عَنِ الْآخِرَةِ هُمْ غَافِلُونَ
वे तो जानते हैं बस ऊपरी सांसारिक जीवन को तथा[1] वे परलोक से अचेत हैं।
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1. अर्थात सुख-सुविधा और आन्नद को। और वह इस से अचेत हैं कि एक और जीवन भी है जिस में कर्मों के परिणाम सामने आयेंगे। बल्कि यही देखा जाता है कि कभी एक जाति उन्नति कर लेने के पश्चात् असफल हो जाती है।
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1. अर्थात सुख-सुविधा और आन्नद को। और वह इस से अचेत हैं कि एक और जीवन भी है जिस में कर्मों के परिणाम सामने आयेंगे। बल्कि यही देखा जाता है कि कभी एक जाति उन्नति कर लेने के पश्चात् असफल हो जाती है।
तफ़सीर
वे ईमान और शरीयत के नियमों से अनभिज्ञ हैं। वे केवल सांसारिक जीवन के कुछ बाहरी स्वरूप को जानते हैं, जो जीविका कमाने और भौतिक सभ्यता के निर्माण से संबंधित है। जबकि वे आख़िरत से, जो वास्तविक जीवन का घर है, मुँह फेरे हुए हैं, उसपर कोई ध्यान नहीं देते हैं।
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