सूरह 30 · जुज़ 21
Ar-Rum · 30:60
فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ وَلَا يَسْتَخِفَّنَّكَ الَّذِينَ لَا يُوقِنُونَ
तो आप सहन करें, वास्तव में, अल्लाह का वचन सत्य है और कदापि वो आप[1] को हल्का न समझें, जो विश्वास नहीं रखते।
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1. अन्तिम आयत में आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को धैर्य तथा साहस रखने का आदेश दिया गया है। और अल्लाह ने जो विजय देने तथा सहायता करने का वचन दिया है उस के पूरा होने और निराश न होने के लिये कहा जा रहा है।
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1. अन्तिम आयत में आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को धैर्य तथा साहस रखने का आदेश दिया गया है। और अल्लाह ने जो विजय देने तथा सहायता करने का वचन दिया है उस के पूरा होने और निराश न होने के लिये कहा जा रहा है।
तफ़सीर
(ऐ रसूल) आप अपनी जाति के आपको झुठलाने पर सब्र से काम लें। निश्चित रूप से अल्लाह ने आपसे जो सहायता और प्रभुत्व प्रदान करने का वादा किया है, वह सच्चा है, उसमें कोई संदेह नहीं है। और वे लोग जो दोबारा जीवित कर उठाए जाने पर विश्वास नहीं रखते हैं, आपको जल्दी करने और सब्र छोड़ने पर न उभारें।
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