सूरह 30 · जुज़ 21
Ar-Rum · 30:32
مِنَ الَّذِينَ فَرَّقُوا دِينَهُمْ وَكَانُوا شِيَعًا ۖ كُلُّ حِزْبٍ بِمَا لَدَيْهِمْ فَرِحُونَ
उनमें से जिन्होंने अलग बना लिया अपना धर्म और हो गये कई गिरोह, प्रत्येक गिरोह उसीमें[1] जो उसके पास है, मगन है।
____________________
1. वह समझता है कि मैं ही सत्य पर हूँ और उन्हें तथ्य की कोई चिन्ता नहीं।
____________________
1. वह समझता है कि मैं ही सत्य पर हूँ और उन्हें तथ्य की कोई चिन्ता नहीं।
तफ़सीर
उन मुश्रिकों में से न हो जाओ, जिन्होंने अपने धर्म को बदल दिया और उसके कुछ भाग पर ईमान लाए और कुछ का इनकार किया और वे कई समूहों और दलों में बँट गए। उनमें से प्रत्येक दल, उसके पास जो असत्य है, उसी पर खुश है। वे समझते हैं कि वही अकेले सत्य पर हैं और उनके सिवा अन्य लोग असत्य पर हैं।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें