सूरह 30 · जुज़ 21
Ar-Rum · 30:30
فَأَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ حَنِيفًا ۚ فِطْرَتَ اللَّهِ الَّتِي فَطَرَ النَّاسَ عَلَيْهَا ۚ لَا تَبْدِيلَ لِخَلْقِ اللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ الدِّينُ الْقَيِّمُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
तो (हे नबी!) आप सीधा रखें अपना मुख इस धर्म की दिशा में, एक ओर होकर, उस स्वभाव पर, पैदा किया है अल्लाह ने मनुष्यों को जिस[1] पर। बदलना नहीं है अल्लाह के धर्म को, यही स्वभाविक धर्म है, किन्तु अधिक्तर लोग नहीं[2] जानते।
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1. एक ह़दीस में कुछ इस प्रकार आया है कि प्रत्येक शिशु प्रकृति (नेचर, अर्थात इस्लाम) पर जन्म लेता है। परन्तु उस के माँ-बाप उसे यहूदी या ईसाई या मजूसी बना देते हैं। (देखिये सह़ीह़ मुस्लिमः 2656) और यदि उस के माता पिता हिन्दु अथवा बुध्द या और किछ हैं तो वे अपने सिशु को अपने धर्म के रंग में रंग देते हैं। आयत का भावार्थ यह है कि स्वभाविक धर्म इस्लाम और तौह़ीद को न बदलो बल्कि सह़ीह पालन-पोषण द्वारा अपने शिशु को इसी स्वभाविक धर्म इस्लाम की शिक्षा। 2. इसी लिये वह इस्लाम और तौह़ीद को नहीं पहचानते।
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1. एक ह़दीस में कुछ इस प्रकार आया है कि प्रत्येक शिशु प्रकृति (नेचर, अर्थात इस्लाम) पर जन्म लेता है। परन्तु उस के माँ-बाप उसे यहूदी या ईसाई या मजूसी बना देते हैं। (देखिये सह़ीह़ मुस्लिमः 2656) और यदि उस के माता पिता हिन्दु अथवा बुध्द या और किछ हैं तो वे अपने सिशु को अपने धर्म के रंग में रंग देते हैं। आयत का भावार्थ यह है कि स्वभाविक धर्म इस्लाम और तौह़ीद को न बदलो बल्कि सह़ीह पालन-पोषण द्वारा अपने शिशु को इसी स्वभाविक धर्म इस्लाम की शिक्षा। 2. इसी लिये वह इस्लाम और तौह़ीद को नहीं पहचानते।
तफ़सीर
(ऐ रसूल) आप और आपके साथी उस धर्म की ओर उन्मुख हो जाएँ, जिसकी ओर अल्लाह ने आपको निर्देशित किया है; सभी धर्मों से उपेक्षाकर उसी की ओर एकाग्र होकर। वह इस्लाम धर्म है, जिसपर अल्लाह ने लोगों को पैदा किया है। अल्लाह की रचना में कोई बदलाव नहीं हो सकता। यही सीधा धर्म है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है। लेकिन अधिकतर लोगों को नहीं पता है कि सच्चा धर्म यही (इस्लाम) धर्म है।
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