सूरह 30 · जुज़ 21
Ar-Rum · 30:28
ضَرَبَ لَكُمْ مَثَلًا مِنْ أَنْفُسِكُمْ ۖ هَلْ لَكُمْ مِنْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ مِنْ شُرَكَاءَ فِي مَا رَزَقْنَاكُمْ فَأَنْتُمْ فِيهِ سَوَاءٌ تَخَافُونَهُمْ كَخِيفَتِكُمْ أَنْفُسَكُمْ ۚ كَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
उसने एक उदाहरण दिया है स्वयं तुम्हाराः क्या तुम्हारे[1] दासों में से तुम्हारा कोई साझी है उसमें, जो जीविका प्रदान की है हमने तुम्हें, तो तुम उसमें उसके बराबर हो, उनसे डरते हो जैसे अपनों से डरते हो? इसी प्रकार, हम वर्णन करते हैं आयतों का, उन लोगों के लिए, जो समझ रखते हैं।
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1. परलोक और एकेश्वरवाद के तर्कों का वर्णन करने के पश्चात् इस आयत में शुध्द एकेश्वरवाद के प्रमाण प्रस्तुत किये जा रहे हैं कि जब तुम स्वयं अपने दासों को अपनी जीविका में साझी नहीं बना सकते तो जिस अल्लाह ने सब को बनाया है उस की वंदना उपासना में दूसरों को कैसे साझी बनाते हो?
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1. परलोक और एकेश्वरवाद के तर्कों का वर्णन करने के पश्चात् इस आयत में शुध्द एकेश्वरवाद के प्रमाण प्रस्तुत किये जा रहे हैं कि जब तुम स्वयं अपने दासों को अपनी जीविका में साझी नहीं बना सकते तो जिस अल्लाह ने सब को बनाया है उस की वंदना उपासना में दूसरों को कैसे साझी बनाते हो?
तफ़सीर
(ऐ मुश्रिको!) अल्लाह ने तुम्हारे लिए तुम्हीं से लिया गया एक उदाहरण प्रस्तुत किया है : क्या तुम्हारे गुलामों और दासों में से कोई तुम्हारा साझी है, जो तुम्हारे धन में बराबर का हिस्सेदार है, कि तुम डरते हो कि वह तुम्हारे साथ तुम्हारे धन को विभाजित कर लेगा, जिस तरह कि तुममें से कुछ अपने आज़ाद साथी से डरते हैं कि वह उसके साथ धन बांट लेगा? क्या तुम अपने लिए अपने गुलामों की इस साझेदारी को पसंद करोगे? निःसंदेह तुम ऐसा पसंद नहीं करोगे। तो फिर अल्लाह इस बात का सबसे अधिक हक़दार है कि उसके प्राणियों और दासों में से कोई उसके राज्य में उसका साझेदार न हो। इसी तरह उदाहरण प्रस्तुत करने आदि के द्वारा, हम उन लोगों के लिए विविध प्रकार के तर्क और प्रमाण पेश करते हैं, जो समझ-बूझ रखते हैं। क्योंकि वही लोग इससे लाभान्वित होते हैं।
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