सूरह 30 · जुज़ 21
Ar-Rum · 30:13
وَلَمْ يَكُنْ لَهُمْ مِنْ شُرَكَائِهِمْ شُفَعَاءُ وَكَانُوا بِشُرَكَائِهِمْ كَافِرِينَ
और नहीं होगा उनके साझियों में उनका अभिस्तावक (सिफ़ारिशी) और वे अपने साझियों का इन्कार करने वाले[1] होंगे।
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1. क्यों कि वह देख लेंगे कि उन्हें सिफ़ारिश करने का कोई अधिकार नहीं होगा। (देखियेः सूरह अन्आम, आयतः23)
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1. क्यों कि वह देख लेंगे कि उन्हें सिफ़ारिश करने का कोई अधिकार नहीं होगा। (देखियेः सूरह अन्आम, आयतः23)
तफ़सीर
और उनके लिए उनके साझियों में से (जिनकी वे दुनिया में पूजा करते थे) उन्हें यातना से बचाने के लिए सिफ़ारिश करने वाले नहीं होंगे। और वे अपने साझियों का इनकार कर बैठेंगे। क्योंकि उन्होंने ज़रूरत पड़ने पर उन्हें छोड़ दिया। इसलिए कि वे सभी तबाही में बराबर हैं।
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