सूरह 3 · जुज़ 3
Ali 'Imran · 3:90
إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بَعْدَ إِيمَانِهِمْ ثُمَّ ازْدَادُوا كُفْرًا لَنْ تُقْبَلَ تَوْبَتُهُمْ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الضَّالُّونَ
वास्तव में, जो अपने ईमान लाने के पश्चात् काफ़िर हो गये, फिर कुफ़्र में बढ़ते गये, तो उनकी तौबा (क्षमा याचना) कदापि[1] स्वीकार नहीं की जायेगी तथा वही कुपथ हैं।
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1. अर्थात यदि मौत के समय क्षमा याचना करें।
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1. अर्थात यदि मौत के समय क्षमा याचना करें।
तफ़सीर
निःसंदेह जिन लोगों ने अपने ईमान के बाद कुफ़्र किया और अपने कुफ़्र पर बने रहे यहाँ तक कि उन्होंने मृत्यु को देख लिया; तो मृत्यु के उपस्थित होने के समय उनसे तौबा हरगिज़ क़बूल नहीं की जाएगी क्योंकि उसका समय बीत चुका। और यही लोग हैं जो अल्लाह की ओर ले जाने वाले सीधे मार्ग से भटके हुए हैं।
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