सूरह 3 · जुज़ 3
Ali 'Imran · 3:66
هَا أَنْتُمْ هَٰؤُلَاءِ حَاجَجْتُمْ فِيمَا لَكُمْ بِهِ عِلْمٌ فَلِمَ تُحَاجُّونَ فِيمَا لَيْسَ لَكُمْ بِهِ عِلْمٌ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنْتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
और फिर तुम्हीं ने उस विषय में विवाद किया, जिसका तुम्हें कुछ ज्ञान[1] था, तो उस विषय में क्यों विवाद कर रहे हो, जिसका तुम्हें कोई ज्ञान[2] नहीं था? तथा अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते।
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1. अर्थात अपने धर्म के विषय में। 2. अर्थात इब्राहीम अलैहिस्सलाम के धर्म के बारे में।
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1. अर्थात अपने धर्म के विषय में। 2. अर्थात इब्राहीम अलैहिस्सलाम के धर्म के बारे में।
तफ़सीर
ऐ किताब वालो! तुमने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अपने धर्म के मामले में तथा अपने ऊपर उतरी हुई पुस्तक के बारे में बहस किया, जिसका तुम्हें ज्ञान था, परंतु तुम इबराहीम अलैहिस्सलाम और उनके धर्म के संबंध में क्यों बहस करते हो, जिसका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं है, जो न तो तुम्हारी पुस्तकों में है, और न तुम्हारे नबियों द्वारा लाया गया है?! वास्तव में, अल्लाह ही मामलों के तथ्यों और उनकी आंतरिक बातों को जानता है और तुम नहीं जानते।
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