सूरह 3 · जुज़ 3

Ali 'Imran · 3:47

قَالَتْ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي وَلَدٌ وَلَمْ يَمْسَسْنِي بَشَرٌ ۖ قَالَ كَذَٰلِكِ اللَّهُ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ ۚ إِذَا قَضَىٰ أَمْرًا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُ كُنْ فَيَكُونُ

मर्यम ने (आश्चर्य से) कहाः मेरे पालनहार! मुझे पुत्र कहाँ से होगा, मुझे तो किसी पुरुष ने हाथ भी नहीं लगाया है? उसने[1] कहाः इसी प्रकार अल्लाह जो चाहता है, उत्पन्न कर देता है। जब वह किसी काम के करने का निर्णय कर लेता है, तो उसके लिए कहता है किः "हो जा", तो वह हो जाता है।
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1. अर्थात फ़रिश्ते ने।

तफ़सीर

मरयम ने इस बात से आश्चर्यचकित होकर कि उनके हाँ बिना पति के एक बेटा होगा, कहा : मेरे हाँ पुत्र कैसे होगा, जबकि कोई मनुष्य वैध अथवा अवैध तरीक़े से मेरे पास नहीं आया?! फ़रिश्ते ने उनसे कहा : जिस तरह अल्लाह तुम्हारे हाँ बिना बाप के लड़का पैदा करेगा, उसी तरह वह जो चाहता है, सामान्य नियम के विपरीत पैदा करता है। इसलिए जब वह किसी काम का इरादा कर लेता है, तो उससे कहता है : "हो जा" तो वह हो जाता है। अतः उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।

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