सूरह 3 · जुज़ 3
Ali 'Imran · 3:44
ذَٰلِكَ مِنْ أَنْبَاءِ الْغَيْبِ نُوحِيهِ إِلَيْكَ ۚ وَمَا كُنْتَ لَدَيْهِمْ إِذْ يُلْقُونَ أَقْلَامَهُمْ أَيُّهُمْ يَكْفُلُ مَرْيَمَ وَمَا كُنْتَ لَدَيْهِمْ إِذْ يَخْتَصِمُونَ
ये ग़ैब (परोक्ष) की सूचनायें हैं, जिन्हें हम आपकी ओर प्रकाशना कर रहे हैं और आप उनके पास उपस्थित नहीं थे, जब वे अपनी लेखनियाँ[1] फेंक रहे थे कि कौन मर्यम का अभिरक्षण करेगा और न उनके पास उपस्थित थे, जब वे झगड़ रहे थे।
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1. अर्थात यह निर्णय करने के लिये कि मर्यम का संरक्षक कौन हो?
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1. अर्थात यह निर्णय करने के लिये कि मर्यम का संरक्षक कौन हो?
तफ़सीर
ज़करिय्या और मरयम अलैहिमस्सलाम के बारे में उपर्युक्त बातें परोक्ष (ग़ैब) की खबरों में से हैं, जो हम (ऐ रसूल!) आपकी ओर वह़्य करते हैं। और आप उन विद्वानों और नेक लोगों के पास उस समय उपस्थित नहीं थे, जब उन्होंने इस बारे में झगड़ा किया था कि मरयम के पालन-पोषण का अधिक योग्य कौन है, यहाँ तक कि उन्हें क़ुर'आ-अंदाज़ी का सहारा लेना पड़ा। चुनाँचे उन्होंने अपनी क़लमों को डाला, तो ज़करिय्या अलैहिस्सलाम की क़लम जीत गई।
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