सूरह 3 · जुज़ 3

Ali 'Imran · 3:36

فَلَمَّا وَضَعَتْهَا قَالَتْ رَبِّ إِنِّي وَضَعْتُهَا أُنْثَىٰ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا وَضَعَتْ وَلَيْسَ الذَّكَرُ كَالْأُنْثَىٰ ۖ وَإِنِّي سَمَّيْتُهَا مَرْيَمَ وَإِنِّي أُعِيذُهَا بِكَ وَذُرِّيَّتَهَا مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ

फिर जब उसने बालिका जनी, तो (संताप से) कहाः मेरे पालनहार! मुझे तो बालिका हो गयी, हालाँकि जो उसने जना, उसका अल्लाह को भली-भाँति ज्ञान था -और नर नारी के समान नहीं होता- और मैंने उसका नाम मर्यम रखा है और मैं उसे तथा उसकी संतान को धिक्कारे हुए शैतान से तेरी शरण में देती हूँ।[1]
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1. हदीस में है कि जब कोई शिशु जन्म लेता है, तो शैतान उसे स्पर्श करता है, जिस के कारण वह चीख कर रोता है, परन्तु मर्यम और उस के पुत्र को स्पर्श नहीं किया था। (सह़ीह़ बुख़ारीः4548)

तफ़सीर

फिर जब उनका गर्भ पूरा हो गया, तो उन्होंने उसे जन दिया जो उनके पेट में था और (वह उम्मीद कर रही थीं कि गर्भ पुरुष होगा, इसलिए) क्षमा चाहते हुए कहा : ऐ मेरे पालनहार! यह तो मैंने बच्ची जनी है! और अल्लाह ज़्यादा जानने वाला है जो उन्होंने जना, और वह लड़का जिसकी वह आशा कर रही थीं, शक्ति और संरचना में उस लड़की के समान नहीं, जो उन्हें दी गई थी। तथा मैंने उसका नाम मरयम रखा है और मैंने उसे और उसकी संतान को तेरी दया से निष्कासित शैतान से तेरे संरक्षण में दे दिया है।

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