सूरह 3 · जुज़ 3
Ali 'Imran · 3:30
يَوْمَ تَجِدُ كُلُّ نَفْسٍ مَا عَمِلَتْ مِنْ خَيْرٍ مُحْضَرًا وَمَا عَمِلَتْ مِنْ سُوءٍ تَوَدُّ لَوْ أَنَّ بَيْنَهَا وَبَيْنَهُ أَمَدًا بَعِيدًا ۗ وَيُحَذِّرُكُمُ اللَّهُ نَفْسَهُ ۗ وَاللَّهُ رَءُوفٌ بِالْعِبَادِ
जिस दिन प्रत्येक प्राणी ने जो सुकर्म किया है, उसे उपस्थित पायेगा तथा जिसने कुकर्म किया है, वह कामना करेगा कि उसके तथा उसके कुकर्मों के बीच बड़ी दूरी होती तथा अल्लाह तुम्हें स्वयं से डराता[1] है और अल्लाह अपने भक्तों के लिए अति करुणामय है।
____________________
1. अर्थात अपनी अवैज्ञा से।
____________________
1. अर्थात अपनी अवैज्ञा से।
तफ़सीर
क़ियामत के दिन प्रत्येक प्राणी अपने अच्छे कार्य को बिना किसी कमी के सामने हाज़िर पाएगा तथा जिसने बुरा कार्य किया होगा, वह कामना करेगा कि उसके तथा उसके बुरे कर्मों के बीच एक लंबा समय होता। लेकिन उसकी कामना कैसे पूरी हो सकती है! और अल्लाह तुम्हें अपने आपसे डराता है। अतः पाप करके अपने आपको उसके क्रोध से पीड़ित न करो। अल्लाह अपने बंदों के प्रति अत्यंत करुणामय है। इसीलिए उन्हें चेतावनी देता है और उन्हें डराता है।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें