सूरह 3 · जुज़ 3
Ali 'Imran · 3:21
إِنَّ الَّذِينَ يَكْفُرُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ وَيَقْتُلُونَ النَّبِيِّينَ بِغَيْرِ حَقٍّ وَيَقْتُلُونَ الَّذِينَ يَأْمُرُونَ بِالْقِسْطِ مِنَ النَّاسِ فَبَشِّرْهُمْ بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
जो लोग अल्लाह की आयतों के साथ कुफ़्र करते हों तथा नबियों को अवैध वध करते हों, तथा उन लोगों का वध करते हों, जो न्याय का आदेश देते हैं, तो उन्हें दुःखदायी यातना[1] की शुभ सूचना सुना दो।
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1. इस में यहूद की आस्थिक तथा कर्मिक कुपथा की ओर संकेत है।
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1. इस में यहूद की आस्थिक तथा कर्मिक कुपथा की ओर संकेत है।
तफ़सीर
जो लोग अल्लाह के उन तर्कों का इनकार करते हैं जो उसने उनपर उतारे हैं, तथा उसके नबियों को बिना अधिकार के अन्याय व आक्रामकता के साथ क़त्ल करते हैं और उन लोगों को क़त्ल करते हैं, जो लोगों में से न्याय करने का आदेश देते हैं और वे अच्छी बात का आदेश देने वाले और बुराई से रोकने वाले लोग हैं, तो इन काफ़िर हत्यारों को एक दर्दनाक यातना की शुभ सूचना दे दें।
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