सूरह 3 · जुज़ 4
Ali 'Imran · 3:195
فَاسْتَجَابَ لَهُمْ رَبُّهُمْ أَنِّي لَا أُضِيعُ عَمَلَ عَامِلٍ مِنْكُمْ مِنْ ذَكَرٍ أَوْ أُنْثَىٰ ۖ بَعْضُكُمْ مِنْ بَعْضٍ ۖ فَالَّذِينَ هَاجَرُوا وَأُخْرِجُوا مِنْ دِيَارِهِمْ وَأُوذُوا فِي سَبِيلِي وَقَاتَلُوا وَقُتِلُوا لَأُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَلَأُدْخِلَنَّهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ثَوَابًا مِنْ عِنْدِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عِنْدَهُ حُسْنُ الثَّوَابِ
तो उनके पालनहार ने उनकी (प्रार्थना) सुन ली, (तथा कहा किः) निःसंदेह मैं किसी कार्यकर्ता के कार्य को व्यर्थ नहीं करता[1], नर हो अथवा नारी। तो जिन्होंने हिजरत (प्रस्थान) की, अपने घरों से निकाले गये, मेरी राह में सताये गये और युध्द किया तथा मारे गये, तो हम अवश्य उनके दोषों को क्षमा कर देंगे तथा उन्हें ऐसे स्वर्गों में प्रवेश देंगे, जिनमें नहरें बह रही हैं। ये अल्लाह के पास से उनका प्रतिफल होगा और अल्लाह ही के पास अच्छा प्रतिफल है।
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1. अर्थात अल्लाह का यह नियम है कि वह सत्कर्म अकारथ नहीं करता, उस का प्रतिफल अवश्य देता है।
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1. अर्थात अल्लाह का यह नियम है कि वह सत्कर्म अकारथ नहीं करता, उस का प्रतिफल अवश्य देता है।
तफ़सीर
उनके पालनहार ने उनकी प्रार्थना का उत्तर दिया : मैं तुम्हारे कर्मों का बदला बर्बाद नहीं करता, चाहे वह कम हो या ज़्यादा और कार्य करने वाला पुरुष हो या महिला। क्योंकि इस धर्म में तुम सब लोगों का हुक्म एक है। न तो किसी पुरुष की नेकी में वृद्धि की जाएगी और न तो किसी महिला की नेकी में कमी की जाएगी। अतः जिन लोगों ने अल्लाह के रास्ते में हिजरत की, और काफ़िरों ने उन्हें उनके घरों से निकाल दिया, और उन्हें अपने पालनहार के आज्ञापालन के कारण कष्ट दिया गया, और उन्होंने अल्लाह के रास्ते में लड़ाई की और अल्लाह के शब्द (वचन) को सर्वोच्च करने के लिए शहीद कर दिए गए, तो मैं क़यामत के दिन अवश्य उनकी बुराइयों को क्षमा कर दूँगा और उन्हें नज़रंदाज़ कर दूँगा, और उन्हें अवश्य ऐसी जन्नतों में दाख़िल करूँगा, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं। यह अल्लाह की ओर से बदला होगा। और अल्लाह के पास ऐसा उत्तम बदला है जिसका कोई उदाहरण नहीं।
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