सूरह 3 · जुज़ 4

Ali 'Imran · 3:186

۞ لَتُبْلَوُنَّ فِي أَمْوَالِكُمْ وَأَنْفُسِكُمْ وَلَتَسْمَعُنَّ مِنَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ مِنْ قَبْلِكُمْ وَمِنَ الَّذِينَ أَشْرَكُوا أَذًى كَثِيرًا ۚ وَإِنْ تَصْبِرُوا وَتَتَّقُوا فَإِنَّ ذَٰلِكَ مِنْ عَزْمِ الْأُمُورِ

(हे ईमान वालो!) तुम्हारे धनों तथा प्राणों में तुम्हारी परीक्षा अवश्य ली जायेगी और तुम उनसे अवश्य बहुत सी दुःखद बातें सुनोगे, जो तुमसे पूर्व पुस्तक दिये गये तथा उनसे जो मिश्रणवादी[1] हैं। अब यदि तुमने सहन किया और (अल्लाह से) डरते रहे, तो ये बड़ी साहस की बात होगी।
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1. मिश्रणवादी अर्थात मूर्तियों के पुजारी, जो पूजा अर्चना तथा अल्लाह के विशेष गुणों में अन्य को उस का साझी बनाते हैं।

तफ़सीर

(ऐ ईमान वालो) तुम्हारा अपने धनों के बारे में, उनमें अनिवार्य अधिकारों की अदायगी तथा उनपर उतरने वाली आपदाओं के द्वारा परीक्षण किया जाएगा। इसी तरह तुम्हारा अपने प्राणों के बारे में, शरीयत के आदेशों के पालन एवं विभिन्न प्रकार की विपत्तियों के द्वारा, ज़रूर परीक्षण किया जाएगा। साथ ही तुम्हें उन लोगों की तरफ़ से जो तुमसे पहले किताब दिए गए तथा उन लोगों की तरफ़ से जिन्होंने शिर्क किया तुम्हारे बारे में तथा तुम्हारे धर्म के संबंध में बहुत-सी दु:खदायी बातें सुनने को मिलेंगी। यदि तुम इन पहुँचने वाली विपत्तियों और परीक्षणों पर धैर्य से काम लो और अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचकर, डरते रहो, तो यह ऐसे कामों में से है, जिसके लिए दृढ़ संकल्प की ज़रूरत होती है, और प्रतिस्पर्धा करने वाले इसमें परस्पर प्रतिस्पर्धा करते हैं।

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