सूरह 3 · जुज़ 4

Hasbunallahu wa ni'mal wakeel · Ali 'Imran 3:173

الَّذِينَ قَالَ لَهُمُ النَّاسُ إِنَّ النَّاسَ قَدْ جَمَعُوا لَكُمْ فَاخْشَوْهُمْ فَزَادَهُمْ إِيمَانًا وَقَالُوا حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ

ये वे लोग हैं, जिनसे लोगों ने कहा कि तुम्हारे लिए लोगों (शत्रु) ने (वापिस आने का) संकल्प[1] लिया है। अतः उनसे डरो, तो इस (सूचना) ने उनके ईमान को और अधिक कर दिया और उन्होंने कहाः हमें अल्लाह बस है और वह अच्छा काम बनाने वाला है।
____________________
1. अर्थात शत्रु ने मक्का जाते हुये राह में सोचा कि मुसलमानों के परास्त हो जाने पर यह अच्छा अवसर था कि मदीने पर आक्रमण करके उन का उनमूलन कर दिया जाये, तथा वापिस आने का निश्चय किया। (तफ़्सीरे क़ुर्तुबी)

तफ़सीर

ये वही लोग हैं जिनसे कुछ मुश्रिकों ने कहा : कुरैश ने अबू सुफ़यान के नेतृत्व में तुमसे लड़ने और तुम्हें विनष्ट करने के लिए बहुत बड़ी सेना इकट्ठा कर ली है। अतः उनसे डरो और उनसे मुठभेड़ करने से बचो। तो उनकी इस बात और इस भय दिलाने से उनका अल्लाह पर विश्वास और उसके वादे पर भरोसा और बढ़ गया। चुनाँचे वे यह कहते हुए मुश्रिकों से मुठभेड़ करने के लिए निकल पड़े कि : अल्लाह हमारे लिए काफी है। और वह सबसे अच्छा है जिसे हम अपना मामला सौंपते हैं।

पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें

आपकी भाषा में तफ़सीर

अरबी तफ़सीरें

अनुवाद

सुनें