सूरह 3 · जुज़ 4

Ali 'Imran · 3:164

لَقَدْ مَنَّ اللَّهُ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ إِذْ بَعَثَ فِيهِمْ رَسُولًا مِنْ أَنْفُسِهِمْ يَتْلُو عَلَيْهِمْ آيَاتِهِ وَيُزَكِّيهِمْ وَيُعَلِّمُهُمُ الْكِتَابَ وَالْحِكْمَةَ وَإِنْ كَانُوا مِنْ قَبْلُ لَفِي ضَلَالٍ مُبِينٍ

अल्लाह ने ईमान वालों पर उपकार किया है कि उनमें उन्हीं में से एक रसूल भेजा, जो उनके सामने (अल्लाह) की आयतें पढ़ता है, उन्हें शुध्द करता है तथा उन्हें पुस्तक (क़ुर्आन) और ह़िक्मत (सुन्नत) की शिक्षा देता है, यद्यपि वे इससे पहले खुले कुपथ में थे।

तफ़सीर

वस्तुतः अल्लाह ने मोमिनों को अनुग्रह प्रदान किया और उन पर बड़ा उपकार किया है कि उनके अंदर उन्हीं में से एक रसूल भेजा, जो उन्हें क़ुरआन पढ़कर सुनाता है और उन्हें शिर्क (बहुदेववाद) और दुष्ट नैतिकता (दुराचार) से शुद्ध करता है, तथा उन्हें क़ुरआन और सुन्नत की शिक्षा देता है, हालाँकि वे इस रसूल के अवतरण से पूर्व संमार्ग से दूर खुली गुमराही में पड़े थे।

पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें

आपकी भाषा में तफ़सीर

अरबी तफ़सीरें

अनुवाद

सुनें