सूरह 3 · जुज़ 3

Ali 'Imran · 3:15

۞ قُلْ أَؤُنَبِّئُكُمْ بِخَيْرٍ مِنْ ذَٰلِكُمْ ۚ لِلَّذِينَ اتَّقَوْا عِنْدَ رَبِّهِمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا وَأَزْوَاجٌ مُطَهَّرَةٌ وَرِضْوَانٌ مِنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ بَصِيرٌ بِالْعِبَادِ

(हे नबी!) कह दोः क्या मैं तुम्हें इससे उत्तम चीज़ बता दूँ? उनके लिए जो डरें, उनके पालनहार के पास ऐसे स्वर्ग हैं, जिनमें नहरें बह रही हैं। वे उनमें सदावासी होंगे और निर्मल पत्नियाँ होंगी तथा अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त होगी और अल्लाह अपने भक्तों को देख रहा है।

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) कह दीजिए : क्या मैं तुम्हें इन इच्छाओं से बेहतर चीज़ के बारे में बताऊँ? जो लोग अल्लाह की आज्ञाकारिता करके और उसकी अवज्ञा को त्यागकर उससे डरते हैं, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें वे हमेशा रहने वाले हैं, न उन्हें मौत आएगी और न उनका विनाश होगा। उनके लिए उसमें ऐसी पत्नियाँ होंगी जो अपनी संरचना और आचरण में सभी बुराइयों से शुद्ध होंगी। इसके बावजूद, उनपर अल्लाह की ओर से प्रसन्नता उतरेगी, फिर वह उनसे कभी नाराज़ नहीं होगा। और अल्लाह अपने बंदों के हालात से अवगत है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है, और वह उन्हें उनपर बदला देगा।

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