सूरह 3 · जुज़ 3
Ali 'Imran · 3:13
قَدْ كَانَ لَكُمْ آيَةٌ فِي فِئَتَيْنِ الْتَقَتَا ۖ فِئَةٌ تُقَاتِلُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَأُخْرَىٰ كَافِرَةٌ يَرَوْنَهُمْ مِثْلَيْهِمْ رَأْيَ الْعَيْنِ ۚ وَاللَّهُ يُؤَيِّدُ بِنَصْرِهِ مَنْ يَشَاءُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِأُولِي الْأَبْصَارِ
वास्तव में, तुम्हारे लिए उन दो दलों में, जो (बद्र में) सम्मुख हो गये, एक निशानी थी; एक अल्लाह की राह में युध्द कर रहा था तथा दूसरा काफ़िर था, वे (अर्थात काफ़िर गिरोह के लोग) अपनी आँखों से देख रहे थे कि ये (मुसलमान) तो दुगने लग रहे हैं तथा अल्लाह अपनी सहायता द्वारा जिसे चाहे, समर्थन देता है। निःसंदेह इसमें समझ-बूझ वालों के लिए बड़ी शिक्षा[1] है।
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1. अर्थात इस बात की कि विजय अल्लाह के समर्थन से प्राप्त होती है, सेना की संख्या से नहीं।
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1. अर्थात इस बात की कि विजय अल्लाह के समर्थन से प्राप्त होती है, सेना की संख्या से नहीं।
तफ़सीर
तुम्हारे लिए उन दो दलों में एक संकेत और सीख थी, जो बद्र के दिन लड़ने के लिए आपस में मिले थे। उनमें से एक दल ईमान वालों का था और वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके साथियों का दल था। वे अल्लाह के रास्ते में इस उद्देश्य से युद्ध कर रहे थे ताकि अल्लाह की बात सर्वोच्च हो और काफ़िरों की बात नीची हो। और दूसरा दल काफ़िरों का था और वे मक्का के काफ़िर थे, जो गर्व, दिखावा और धार्मिक पक्षपात के तौर पर निकले थे। ईमान वाले उनको अपनी आँखों से वास्तविकता में दोगुना देख रहे थे। तो अल्लाह ने अपने दोस्तों को विजय प्रदान की और अल्लाह जिसे चाहता है अपने विजय के साथ उसका समर्थन करता है। निःसंदेह इसमें इबरत और उपदेश है समझ-बूझ रखने वालों के लिए, ताकि उन्हें मालूम हो जाए कि विजय ईमान वालों के लिए है, अगरचे उनकी संख्या कम हो, और यह कि पराजय असत्यवादियों के लिए है, भले ही उनकी संख्या अधिक हो।
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