सूरह 3 · जुज़ 4
Ali 'Imran · 3:129
وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ يَغْفِرُ لِمَنْ يَشَاءُ وَيُعَذِّبُ مَنْ يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَحِيمٌ
अल्लाह ही का है, जो कुछ आकाशों तथा धरती में है, वह जिसे चाहे, क्षमा करे और जिसे चाहे, दण्ड दे तथा अल्लाह अति क्षमाशील, दयावान् है।
तफ़सीर
जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है, सब अल्लाह का है, रचना की दृष्टि से भी और प्रबंधन की दृष्टि से भी है। वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, अपनी दया से क्षमा कर देता है, और जिसे चाहता है अपने न्याय से सज़ा देता है। और अल्लाह अपने तौबा (पश्चाताप) करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है।
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