सूरह 3 · जुज़ 4
Ali 'Imran · 3:105
وَلَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ تَفَرَّقُوا وَاخْتَلَفُوا مِنْ بَعْدِ مَا جَاءَهُمُ الْبَيِّنَاتُ ۚ وَأُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
तथा उनके[1] समान न हो जाओ, जो खुली निशानियाँ आने के पश्चात्, विभेद तथा आपसी विरोध में पड़ गये और उन्हीं के लिए घोर यातना है।
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1. अर्थात अह्ले किताब (यहूदी व ईसाई)।
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1. अर्थात अह्ले किताब (यहूदी व ईसाई)।
तफ़सीर
(ऐ ईमान वालो) तुम उन किताब वालों की तरह न हो जाओ, जो विभेद करके गिरोहों तथा दलों में बट गए। उन्होंने अल्लाह की ओर से उनके पास स्पष्ट निशानियाँ आ जाने के बाद अपने धर्म के बारे में मतभेद किया। और इन उक्त लोगों के लिए अल्लाह की ओर से बड़ी यातना है।
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