सूरह 29 · जुज़ 21

Al-'Ankabut · 29:47

وَكَذَٰلِكَ أَنْزَلْنَا إِلَيْكَ الْكِتَابَ ۚ فَالَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَمِنْ هَٰؤُلَاءِ مَنْ يُؤْمِنُ بِهِ ۚ وَمَا يَجْحَدُ بِآيَاتِنَا إِلَّا الْكَافِرُونَ

और इसी प्रकार, हमने उतारी है आपकी ओर ये पुस्तक, तो जिन्हें हमने ये पुस्तक प्रदान की है, वे इस (क़ुर्आन) पर ईमान लाते[1] हैं और इनमें से (भी) कुछ[2] इस (क़ुर्आन) पर ईमान ला रहे हैं और हमारी आयतों को काफ़िर ही नहीं मानते हैं।
____________________
1. अर्थात मक्का वासियों में से। 2. अर्थात अह्ले किताब में से जो अपनी पुस्तकों के सत्य अनुयायी हैं।

तफ़सीर

जिस तरह हमने आपसे पहले के नबियों पर किताबें उतारी थीं, उसी तरह हमने आप पर क़ुरआन उतारा है। तो तौरात पढ़ने वालों में से कुछ लोग (जैसे कि अब्दुल्लाह बिन सलाम) इसपर ईमान रखते हैं; क्योंकि वे अपनी किताबों में आपका विवरण पाते हैं। तथा इन मुश्रिकों में से भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो इसपर ईमान रखते हैं। और हमारी आयतों का इनकार केवल वही काफ़िर करते हैं, जो सत्य के स्पष्ट होने के बावजूद उसके इनकार के रास्ते पर चलने के आदी हैं।

पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें

आपकी भाषा में तफ़सीर

अरबी तफ़सीरें

अनुवाद

सुनें