सूरह 29 · जुज़ 20
Al-'Ankabut · 29:40
فَكُلًّا أَخَذْنَا بِذَنْبِهِ ۖ فَمِنْهُمْ مَنْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِ حَاصِبًا وَمِنْهُمْ مَنْ أَخَذَتْهُ الصَّيْحَةُ وَمِنْهُمْ مَنْ خَسَفْنَا بِهِ الْأَرْضَ وَمِنْهُمْ مَنْ أَغْرَقْنَا ۚ وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيَظْلِمَهُمْ وَلَٰكِنْ كَانُوا أَنْفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
तो प्रत्येक को हमने पकड़ लिया उसके पाप के कारण, तो इनमें से कुछ पर पत्थर बरसाये[1] और उनमें से कुछ को पकड़ा[2] कड़ी ध्वनि ने तथा कुछ को धंसा दिया धरती में[3] और कुछ को डुबो[4] दिया तथा नहीं था अल्लाह कि उनपर अत्याचार करता, परन्तु वे स्वयं अपने ऊपर अत्याचार कर रहे थे।
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1. अर्थात लूत की जाति पर। 2. अर्थात सालेह़ और शुऐब (अलैहिमस्सलाम) की जाति को। 3. जैसे क़ारून को। 4. अर्थात नूह़ तथा मूसा (अलैहिमस्सलाम) की जातियों को।
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1. अर्थात लूत की जाति पर। 2. अर्थात सालेह़ और शुऐब (अलैहिमस्सलाम) की जाति को। 3. जैसे क़ारून को। 4. अर्थात नूह़ तथा मूसा (अलैहिमस्सलाम) की जातियों को।
तफ़सीर
अतः हमने उक्त समुदायों में से प्रत्येक को अपनी विनाशकारी यातना के द्वारा पकड़ लिया। उनमें लूत के समुदाय के लोग थे, जिनपर हमने ताबड़-तोड़ कंकरीले पत्थर बरसाए, उनमें सालेह के समुदाय और शुऐब के समुदाय थे, जिन्हें चीख ने पकड़ लिया, उनमें क़ारून था जिसे हमने उसके घर समेत धरती में धँसा दिया, तथा उनमें नूह के समुदाय के लोग, फ़िरऔन और हामान भी थे, जिन्हें हमने डुबो कर विनष्ट कर दिया। अल्लाह ऐसा न था कि उन्हें बिना पाप के नष्ट करके उन पर अत्याचार करे, परंतु वे पाप करके स्वयं अपने आपपर अत्याचार कर रहे थे, इसलिए वे दंड के पात्र थे।
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