सूरह 29 · जुज़ 20
Al-'Ankabut · 29:36
وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًا فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ وَارْجُوا الْيَوْمَ الْآخِرَ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ
तथा मद्यन की ओर उनके भाई शुऐब को (भेजा), तो उसने कहाः हे मेरी जाति के लोगो! इबादत (वंदना) करो अल्लाह की तथा आश रखो प्रयल के दिन[1] की और मत फिरो धरती में उपद्रव करते हूए।
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1. अर्थात संसारिक जीवन की को सब कुछ न समझो, परलोक के अच्छे परिणाम की भी आशा रखो और सदाचार करो।
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1. अर्थात संसारिक जीवन की को सब कुछ न समझो, परलोक के अच्छे परिणाम की भी आशा रखो और सदाचार करो।
तफ़सीर
और हमने मदयन की ओर उनके नसबी भाई शुऐब अलैहिस्सलाम को भेजा, तो उन्होंने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अकेले अल्लाह की इबादत करो और उसकी इबादत करके अंतिम दिन के प्रतिफल की आशा रखो, तथा पाप करके और उसे फैलाकर धरती में बिगाड़ न पैदा करो।
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