सूरह 24 · जुज़ 18

An-Nur · 24:9

وَالْخَامِسَةَ أَنَّ غَضَبَ اللَّهِ عَلَيْهَا إِنْ كَانَ مِنَ الصَّادِقِينَ

और पाँचवीं बार ये (कहे) कि उसपर अल्लाह की धिक्कार हो, यदि वह सच्चा[1] हो।
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1. शरीअत की परिभाषा में इसे "लिआन" कहा जाता है। यह लिआन न्यायालय में अथवा न्यायालय के अधिकारी के समक्ष होना चाहिये। लिआन की माँग पुरुष की ओर से भी हो सकती है और स्त्री की ओर से भी। लिआन के पश्चात् दोनों सदा के लिये अलग हो जायेंगे। लिआन का अर्थ होता होता हैः धिक्कार। और इस में पति और पत्नि दोनों अपने को मिथ्यावादी होने की अवस्था में धिक्कार का पात्र स्वीकार करते हैं। यदि पति अपनी पत्नि के गर्भ का इन्कार करे तब भी लिआन होता है। (बुख़ारीः4746, 4747, 4748)

तफ़सीर

फिर अपनी पाँचवीं गवाही में, वह अपने ऊपर अल्लाह के प्रकोप की बददुआ करेगी, यदि वह (व्यक्ति) उसपर आरोप लगाने में सच्चा है।

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