सूरह 24 · जुज़ 18
An-Nur · 24:43
أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُزْجِي سَحَابًا ثُمَّ يُؤَلِّفُ بَيْنَهُ ثُمَّ يَجْعَلُهُ رُكَامًا فَتَرَى الْوَدْقَ يَخْرُجُ مِنْ خِلَالِهِ وَيُنَزِّلُ مِنَ السَّمَاءِ مِنْ جِبَالٍ فِيهَا مِنْ بَرَدٍ فَيُصِيبُ بِهِ مَنْ يَشَاءُ وَيَصْرِفُهُ عَنْ مَنْ يَشَاءُ ۖ يَكَادُ سَنَا بَرْقِهِ يَذْهَبُ بِالْأَبْصَارِ
क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह बादलों को चलाता है, फिर उन्हें परस्पर मिला देता है, फिर उन्हें घंघोर मेघ बना देता है, फिर आप देखते हैं बूँद को, उसके मध्य से निकलती हुई और वही पर्वतों जैसे बादल से ओले बरसाता है, फिर जिसपर चाहे, आपदा उतारता है और जिससे चाहे, फेर देता है। उसकी बिजली की चमक संभव है कि आँखों को उचक ले।
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते कि अल्लाह बादल को चलाता है। फिर उसके विभिन्न भागों को एक-दूसरे से मिला देता है। फिर उसे जमाकर तह-ब-तह कर देता है। फिर तुम देखते हो कि बारिश बादल के अंदर से निकल रही है। और वह आकाश की दिशा से, उसमें घनीभूत बादलों से जो अपनी भव्यता में पहाड़ों जैसा दिखते हैं, कंकड़ जैसे पानी के जमे हुए टुकड़े (ओले) उतारता है, फिर उस ओले को अपने बंदों में से जिसपर चाहता है, उतारता है और उनमें से जिससे चाहता है, उसे फेर देता है। बादल की बिजली की चमक इतनी तेज़ होती है कि लगता है कि आँखों को उचक ले जाएगी।
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