सूरह 24 · जुज़ 18

An-Nur · 24:41

أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُسَبِّحُ لَهُ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَالطَّيْرُ صَافَّاتٍ ۖ كُلٌّ قَدْ عَلِمَ صَلَاتَهُ وَتَسْبِيحَهُ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِمَا يَفْعَلُونَ

क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ही की पवित्रता का गान कर रहे हैं, जो आकाशों तथा धरती में हैं तथा पंख फैलाये हुए पक्षी? प्रत्येक ने अपनी बंदगी तथा पवित्रता गान को जान लिया[1] है और अल्लाह भली-भाँति जानने वाला है, जो वे कर रहे हैं।
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1. अर्थात तुम भी उस की पवित्रता का गान गाओ। और उस की आज्ञा का पालन करो।

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते कि आकाशों और धरती में जो भी प्राणी हैं, सब अल्लाह की पवित्रता बयान करते हैं, तथा पक्षी हवा में अपने पंख फैलाए उसकी पवित्रता का गान करते हैं। इन प्राणियों में से जो नमाज़ पढ़ते हैं, जैसे इनसान, उनकी नमाज़ को तथा इनमें से जो पवित्रता का गान करते हैं, जैसे पक्षी, उनके पवित्रता गान को अल्लाह ने जान लिया है। और अल्लाह उसे पूरी तरह जानने वाला है, जो वे करते हैं। उनके कार्यों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।

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