सूरह 24 · जुज़ 18

An-Nur · 24:27

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَدْخُلُوا بُيُوتًا غَيْرَ بُيُوتِكُمْ حَتَّىٰ تَسْتَأْنِسُوا وَتُسَلِّمُوا عَلَىٰ أَهْلِهَا ۚ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَكُمْ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ

हे ईमान वालो[1]! मत प्रवेश करो किसी घर में, अपने घरों के सिवा, यहाँ तक कि अनुमति ले लो और उनके वासियों को सलाम कर[2] लो, ये तुम्हारे लिए उत्तम है, ताकि तुम याद रखो।
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1. सूरह के आरंभ में यह आदेश दिये गये थे कि समाज में कोई बुराई हो जाये तो उस का निवारण कैसे किया जाये? अब वह आदेश दिये जा रहे हैं जिन से समाज में बुराईयों को जन्म लेने ही से रोक दिया जाये। 2. ह़दीस में इस का नियम यह बताया गया है कि (द्वार पर दायें या बायें खड़े हो कर) सलाम करो। फिर कहो कि क्या भीतर आ जाऊँ? ऐसे तीन बार करो, और अनुमति न मिलने पर वापिस हो जाओ। (बुख़ारीः 6245, मुस्लिमः2153)

तफ़सीर

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर चलने वालो! अपने घरों के सिवा अन्य घरों में उस समय तक प्रवेश न करो, जब तक उसके निवासियों से प्रवेश की अनुमति न ले लो और उन्हें सलाम न कर लो। सलाम करते और अनुमति लेते समय इस तरह कहो : "अस्सलामु अलैकुम, क्या मै अंदर आ सकता हूँ?" यह अनुमति प्राप्त करना जिसका तुम्हें आदेश दिया गया है, अचानक प्रवेश करने से बेहतर है। ताकि तुम अनुमति लेने के इस आदेश को याद रखो और उसका पालन करो।

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