सूरह 24 · जुज़ 18

An-Nur · 24:11

إِنَّ الَّذِينَ جَاءُوا بِالْإِفْكِ عُصْبَةٌ مِنْكُمْ ۚ لَا تَحْسَبُوهُ شَرًّا لَكُمْ ۖ بَلْ هُوَ خَيْرٌ لَكُمْ ۚ لِكُلِّ امْرِئٍ مِنْهُمْ مَا اكْتَسَبَ مِنَ الْإِثْمِ ۚ وَالَّذِي تَوَلَّىٰ كِبْرَهُ مِنْهُمْ لَهُ عَذَابٌ عَظِيمٌ

वास्तव[1] में, जो कलंक घड़ लाये हैं, (वे) तुम्हारे ही भीतर का एक गिरोह है, तुम इसे बुरा न समझो, बल्कि ये तुम्हारे लिए अच्छा[2] है। उनमें से प्रत्येक के लिए जितना भाग लिया, उतना पाप है और जिसने भार लिया उसके बड़े भाग[3] का, तो उसके लिए बड़ी यातना है।
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1. यहाँ से आयत 26 तक उस मिथ्यारोपण का वर्णन किया गया है जो मुनाफ़िक़ों ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्नी आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) पर बनी मुस्तलिक़ के युध्द में वापसी के समय लगाया था। इस युध्द से वापसी के समय नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक स्थान पर पड़ाव किया। अभी कुछ रात रह गयी थी कि यात्रा की तैयारी होने लगी। उस समय आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) उस स्थान से दूर शौच के लिये गईं और उन का हार टूट कर गिर गया। वह उस की खोज में रह गयीं। सेवकों ने उन की पालकी को सवारी पर यह समझ कर लाद दिया कि वह उस में होंगी। वह आयीं तो वहीं लेट गयीं कि कोई अवश्य खोजने आयेगा। थोड़ी देर में सफ़्वान पुत्र मुअत्तल (रज़ियल्लाहु अन्हु) जो यात्रियों के पीछे उन की गिरी-पड़ी चीज़ों को संभालने का काम करते थे वहाँ आ गये। और इन्ना लिल्लाह पढ़ी, जिस से आप जाग गयीं। और उन को पहचान लिया। क्यों कि उन्हों ने पर्दें का आदेश आने से पहले उन्हें देखा था। उन्हों ने आप को अपने ऊँट पर सवार किया और स्वयं पैदल चल कर यात्रियों से जा मिले। द्विधावादियों ने इस अवसर को उचित जाना, और उन के मुखिया अब्दुल्लाह बिन उबय्य ने कहा कि यह एकांत अकारण नहीं था। और आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) को सफ़्वान के साथ कलंकित कर दिया। और उस के षड्यंत्र में कुछ सच्चे मुसलमान भी आ गये। इस का पूरा विवरण ह़दीस में मिलेगा। (देखियेः सह़ीह़ बुख़ारीः4750) 2. अर्थ यह है कि इस दुःख पर तुम्हें प्रतिफल मिलेगा। 3. इस से तात्पर्य अब्दुल्लाह बिन उबय्य द्विधावादियों का मुखिया है।

तफ़सीर

निश्चय जो लोग झूठा आरोप (अर्थात् ईमान वालों की माँ आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा पर व्यभिचार का आरोप) मढ़कर लाए, वे (ऐ मोमिनो!) तुमसे ही संबंध रखने वाले एक समूह हैं। यह मत सोचो कि उन्होंने जो झूठ गढ़ा है, वह तुम्हारे लिए बुरा है। बल्कि वह तुम्हारे लिए अच्छा है, क्योंकि उसमें ईमान वालों के लिए सवाब (पुण्य) और जाँच-पड़ताल है, तथा इसके साथ ही मोमिनों की माँ आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा की पवित्रता (दोष-मुक्त होने) की घोषणा है। जिस किसी ने यह आरोप लगाने में भाग लिया, उसे उसके कमाए हुए पाप के अनुसार बदला मिलेगा। और जिसने इसकी शुरुआत करके इसके बड़े हिस्से का भार उठाया, उसके लिए बहुत बड़ी यातना है। इससे अभिप्राय पाखंडी लोगों का प्रमुख अब्दुल्लाह बिन उबैय इब्ने सलूल है।

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