सूरह 23 · जुज़ 18
Al-Mu'minun · 23:77
حَتَّىٰ إِذَا فَتَحْنَا عَلَيْهِمْ بَابًا ذَا عَذَابٍ شَدِيدٍ إِذَا هُمْ فِيهِ مُبْلِسُونَ
यहाँतक कि जब हम उनपर खोल देंगे कड़ी यातना के[1] द्वार, तो सहसा वे उस समय निराश हो जायेंगे[2]।
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1. कड़ी यातना से अभिप्राय परलोक की यातना है। 2. अर्थात प्रत्येक भलाई से।
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1. कड़ी यातना से अभिप्राय परलोक की यातना है। 2. अर्थात प्रत्येक भलाई से।
तफ़सीर
यहाँ तक कि जब हमने उनपर सख़्त यातना का कोई द्वार खोल दिया, तो तुरंत वे उसमें हर राहत और भलाई से निराश हो गए।
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