सूरह 23 · जुज़ 18

Al-Mu'minun · 23:27

فَأَوْحَيْنَا إِلَيْهِ أَنِ اصْنَعِ الْفُلْكَ بِأَعْيُنِنَا وَوَحْيِنَا فَإِذَا جَاءَ أَمْرُنَا وَفَارَ التَّنُّورُ ۙ فَاسْلُكْ فِيهَا مِنْ كُلٍّ زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ وَأَهْلَكَ إِلَّا مَنْ سَبَقَ عَلَيْهِ الْقَوْلُ مِنْهُمْ ۖ وَلَا تُخَاطِبْنِي فِي الَّذِينَ ظَلَمُوا ۖ إِنَّهُمْ مُغْرَقُونَ

तो हमने उसकी ओर वह़्यी की कि नाव बना हमारी रक्षा में हमारी वह्यी के अनुसार और जब हमारा आदेश आ जाये तथा तन्नूर उबल पड़े, तो रख ले प्रत्येक जीव के एक-एक जोड़े तथा अपने परिवार को, उसके सिवा जिसपर पहले निर्णय हो चुका है उनमें से, और मुझे संबोधित न करना उनके विषय में जिन्होंने अत्याचार किये हैं, निश्चय वे डुबो दिये जायेंगे।

तफ़सीर

हमने नूह़ (अलैहिस्सलाम) को सूचना दी कि हमारी आँखों के सामने और हमारे बताए हुए तरीक़े के अनुसार नौका बना। फिर जब उन्हें नष्ट करने का हमारा आदेश आ जाए और पानी उस स्थान से ज़ोर से उबलने लगे, जिसमें रोटी पकाई जाती है, तो हर जीव में से एक नर और एक मादा उस (नौका) में प्रवेश कर ले, ताकि नस्ल चलती रहे, और अपने परिवार वालों को भी उसमें सवार कर ले, उसको छोड़कर जिसके विनाश की बात अल्लाह की ओर से पहले ही तय हो चुकी, जैसे कि तेरी पत्नी और तेरा पुत्र। और मुझसे उन लोगों की मुक्ति और उन्हें विनाश से बचाने के बारे में बात न करना, जिन्होंने कुफ़्र करके अत्याचार किया है। वे - अनिवार्य रूप से - बाढ़ के पानी में डूबने के द्वारा विनष्ट किए जाने वाले हैं।

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