सूरह 23 · जुज़ 18
Al-Mu'minun · 23:23
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُمْ مِنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ أَفَلَا تَتَّقُونَ
तथा हमने भेजा नूह़[1] को उसकी जाति की ओर, उसने कहाः हे मेरी जाति को लोगो! इबादत (वंदना) अल्लाह की करो, तुम्हारा कोई पूज्य नहीं है उसके सिवा, तो क्या तुम डरते नहीं हो?
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1. यहाँ यह बताया जा रहा है कि अल्लाह ने जिस प्रकार तुम्हारे आर्थिक जीवन के साधन बनाये उसी प्रकार तुम्हारे आत्मिक मार्ग दर्शन की व्यवस्था की और रसूलों को भेजा जिन में नूह़ अलैहिस्सलाम प्रथम रसूल थे।
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1. यहाँ यह बताया जा रहा है कि अल्लाह ने जिस प्रकार तुम्हारे आर्थिक जीवन के साधन बनाये उसी प्रकार तुम्हारे आत्मिक मार्ग दर्शन की व्यवस्था की और रसूलों को भेजा जिन में नूह़ अलैहिस्सलाम प्रथम रसूल थे।
तफ़सीर
हमने नूह अलैहिस्सलाम को उनकी जाति के पास, उनको अल्लाह की ओर बुलाने के लिए भेजा। तो नूह (अलैहिस्सलाम) ने उनसे कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अकेले अल्लाह की इबादत (पूजा) करो। उस पवित्र हस्ती के सिवा तुम्हारा कोई सत्य पूज्य नहीं। क्या तुम अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरते नहीं?!
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