सूरह 23 · जुज़ 18
Al-Mu'minun · 23:105
أَلَمْ تَكُنْ آيَاتِي تُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فَكُنْتُمْ بِهَا تُكَذِّبُونَ
(उनसे कहा जायेगाः) क्या जब मेरी आयतें तुम्हें सुनाई जाती थीं, तो तुम उनको झुठलाते नहीं थे?
तफ़सीर
और उन्हें झिड़कते हुए कहा जाएगा : क्या दुनिया में क़ुरआन की आयतें तुम्हारे सामने पढ़ी न जाती थीं, तो तुम उन्हें झुठलाया करते थे?
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