सूरह 23 · जुज़ 18

Al-Mu'minun · 23:100

لَعَلِّي أَعْمَلُ صَالِحًا فِيمَا تَرَكْتُ ۚ كَلَّا ۚ إِنَّهَا كَلِمَةٌ هُوَ قَائِلُهَا ۖ وَمِنْ وَرَائِهِمْ بَرْزَخٌ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ

संभवतः, मैं अच्छा कर्म करूँगा, उस (संसार में) जिसे छोड़ आया हूँ! कदापि ऐसा नहीं होगा! वह केवल एक कथन है, जिसे वह कह रहा[1] है और उनके पीछे एक आड़[2] है, उनके पुनः जीवित किये जाने के दिन तक।
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1. अर्थात उस के कथन का कोई प्रभाव नहीं होगा। 2. आड़ जिस के लिये बर्ज़ख शब्द आया है, उस अवधि का नाम है जो मृत्यु तथा प्रलय के बीच होगी।

तफ़सीर

ताकि मैं संसार में लौटकर कोई नेक काम कर लूँ। कदापि नहीं, मामला वैसा नहीं है, जैसा कि उसने अनुरोध किया है। यह केवल एक शब्द है जो वह कहने वाला है। अगर उसे सांसारिक जीवन में वापस भेज दिया जाए, तो वह अपना किया हुआ वादा पूरा नहीं करेगा। ये मरने वाले लोग, क़ियामत के दिन तक दुनिया और आख़िरत के बीच एक ओट में रहेंगे। इसलिए वे वहाँ से दुनिया में वापस नहीं आएँगे कि जो कुछ उनसे छूट गया है, उसकी छतिपूर्ति कर लें और जो कुछ उन्होंने बिगाड़ा है, उसे ठीक कर लें।

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