सूरह 22 · जुज़ 17

Al-Hajj · 22:5

يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنْ كُنْتُمْ فِي رَيْبٍ مِنَ الْبَعْثِ فَإِنَّا خَلَقْنَاكُمْ مِنْ تُرَابٍ ثُمَّ مِنْ نُطْفَةٍ ثُمَّ مِنْ عَلَقَةٍ ثُمَّ مِنْ مُضْغَةٍ مُخَلَّقَةٍ وَغَيْرِ مُخَلَّقَةٍ لِنُبَيِّنَ لَكُمْ ۚ وَنُقِرُّ فِي الْأَرْحَامِ مَا نَشَاءُ إِلَىٰ أَجَلٍ مُسَمًّى ثُمَّ نُخْرِجُكُمْ طِفْلًا ثُمَّ لِتَبْلُغُوا أَشُدَّكُمْ ۖ وَمِنْكُمْ مَنْ يُتَوَفَّىٰ وَمِنْكُمْ مَنْ يُرَدُّ إِلَىٰ أَرْذَلِ الْعُمُرِ لِكَيْلَا يَعْلَمَ مِنْ بَعْدِ عِلْمٍ شَيْئًا ۚ وَتَرَى الْأَرْضَ هَامِدَةً فَإِذَا أَنْزَلْنَا عَلَيْهَا الْمَاءَ اهْتَزَّتْ وَرَبَتْ وَأَنْبَتَتْ مِنْ كُلِّ زَوْجٍ بَهِيجٍ

हे लोगो! यदि तुम किसी संदेह में हो, पुनः जीवित होने के विषय में, तो (सोचो कि) हमने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, फिर वीर्य से, फिर रक्त के थक्के से, फिर मांस के खण्ड से, जो चित्रित तथा चित्र विहीन होता है[1], ताकि हम उजागर कर[2] दें तुम्हारे लिए और स्थिर रखते हैं गर्भाशयों में जब तक चाहें; एक निर्धारित अवधि तक, फिर तुम्हें निकालते हैं शिशु बनाकर, फिर ताकि तुम पहुँचों अपने योवन को और तुममें से कुछ, पहले ही मर जाते हैं और तुममें से कुछ, जीर्ण आयु की ओर फेर दिये जाते हैं ताकि उसे कुछ ज्ञान न रह जाये, ज्ञान के पश्चात् तथा तुम देखते हो धरती को सूखी, फिर जब, हम उसपर जल-वर्षा करते हैं, तो सहसा लहलहाने और उभरने लगी तथा उगा देती है प्रत्येक प्रकार की सुदृश्य वनस्पतियाँ।
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1. अर्थात यह वीर्य चालीस दिन के बाद गाढ़ी रक्त बन जाता है। फिर गोश्त का लोथड़ा बन जाता है। फिर उस से सह़ीह़ सलामत बच्चा बन जाता है। और ऐसे बच्चे में जान फूँक दी जाती है। और अपने समय पर उस की पैदाइश हो जाती है। और -अल्लाह की इच्छा से- कभी कुछ कारणों फलस्वरूप ऐसा भी होता है कि खून का वह लोथड़ा अपना सह़ीह़ रूप नहीं धार पाता। और उस में रूह़ भी नहीं फूँकी जाती। और वह अपने पैदाइश के समय से पहले ही गिर जाता है। सह़ीह़ ह़दीसों में भी माँ के पेट में बच्चे की पैदाइश की इन अवस्थाओं की चर्चा मिलती है। उदाहरण स्वरूप, एक ह़दीस में है कि वीर्य चालीस दिन के बाद गाढ़ी खून बन जाता है। फिर चालीस दिन के बाद लोथड़ा अथवा गोश्त की बोटी बन जाता है। फिर अल्लाह की ओर से एक फ़रिश्ता चार शब्द ले कर आता हैः वह संसार में क्या काम करेगा, उस की आयु कितनी होगी, उस को क्या और कितनी जीविका मिलेगी और वह शुभ होगा अथवा अशुभ। फिर वह उस में जान डाल देता है। (देखियेः सह़ीह़ बुख़ारीः 3332) अर्थात चार महीने के बाद उस में जान डाली जाती है। और बच्चा एक सह़ीह़ रूप धारण कर लेता है। इस प्रकार आज जिस को वैज्ञानिकों ने बहुत दौड़ धूप के बाद सिध्द किया है उस को क़ुर्आन ने चौदह सौ साल पूर्व ही बता दिया था। यह इस बात का प्रमाण है कि यह किताब (क़ुर्आन) किसी मानव की बनाई हुई नहीं है, बल्कि अल्लाह की ओर से है। 2. अर्थात् अपनी शक्ति तथा सामर्थ्य को।

तफ़सीर

ऐ लोगो! अगर तुम्हें, मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करने की हमारी शक्ति में संदेह है, तो अपनी रचना पर ग़ौर करो, हमने तुम्हारे पिता आदम को मिट्टी से पैदा किया, फिर उनकी संतान को वीर्य से पैदा किया, जिसे पुरुष स्त्री के गर्भाशय में डालता है, फिर वह वीर्य खून का थक्का बन जाता है, फिर वह खून का थक्का माँस के एक छोटे-से टुकड़े में बदल जाता है, जो एक बार मुँह में डालकर चबाया जा सके, फिर वह माँस का टुकड़ा या तो पूर्ण रचना में परिवर्तित होकर गर्भाशय में मौजूद रहता है, यहाँ तक कि ज़िंदा शिशु के रूप में निकलता है, या अपूर्ण रचना में बदल जाता है जिसे गर्भाशय गिरा देता है, ताकि हम तुम्हें विभिन्न चरणों में पैदा करके अपनी शक्ति के दृश्य दिखाएँ, और हम जिस भ्रूण को चाहते हैं, गर्भाशय में ठहराए रखते हैं, यहाँ तक कि एक निर्धारित समय अर्थात नौ महीने में वह जन्म लेता है, फिर हम तुम्हें तुम्हारी माताओं के पेट से शिशुओं के रूप में निकालते हैं, फिर तुम्हें भरपूर शक्ति और बुद्धि प्रदान करते हैं, तथा तुममें से कुछ लोग इससे पहले मर जाते हैं, और तुममें से कुछ लोग तब तक जीवित रहते हैं जब तक वे जीर्ण आयु तक नहीं पहुँच जाते, जहाँ ताक़त कमज़ोर हो जाती है और दिमाग़ कमज़ोर हो जाता है, यहाँ तक कि बच्चे से भी बदतर हो जाते हैं, उसमें से कुछ भी नहीं जानते जो वे जानते थे। और (इसी तरह) तुम धरती को सूखी देखते हो, उसमें पेड़-पौधे नहीं होते, फिर हम उसमें बारिश का पानी उतारते हैं, तो उसमें पौधे उग आते हैं, वह अपने पौधे की वृद्धि के कारण ऊँची हो जाती है और हर तरह के सुंदर पौधे उगाती है।

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Al-Hajj 22:5 · Tlawati