सूरह 20 · जुज़ 16
Ta-Ha · 20:97
قَالَ فَاذْهَبْ فَإِنَّ لَكَ فِي الْحَيَاةِ أَنْ تَقُولَ لَا مِسَاسَ ۖ وَإِنَّ لَكَ مَوْعِدًا لَنْ تُخْلَفَهُ ۖ وَانْظُرْ إِلَىٰ إِلَٰهِكَ الَّذِي ظَلْتَ عَلَيْهِ عَاكِفًا ۖ لَنُحَرِّقَنَّهُ ثُمَّ لَنَنْسِفَنَّهُ فِي الْيَمِّ نَسْفًا
मूसा ने कहाः जा तेरे लिए जीवन में ये होना है कि तू कहता रहेः मुझे स्पर्श न करना[1]। तथा तेरे लिए एक और[2] वचन है, जिसके विरुध्द कदापि न होगा और अपने पूज्य को देख, जिसका पुजारी बना रहा, हम अवश्य उसे जला देंगे, फिर उसे उड़ा देंगे नदी में चूर-चूर करके।
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1. अर्थात मेरे समीप न आना और न मुझे छूना, मैं अछूत हूँ। 2. अर्थात प्रलोक की यातना का।
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1. अर्थात मेरे समीप न आना और न मुझे छूना, मैं अछूत हूँ। 2. अर्थात प्रलोक की यातना का।
तफ़सीर
मूसा अलैहिस्सलाम ने सामिरी से कहा: अच्छा, तू यहाँ से निकल जा! तेरी सज़ा यह है कि तू जब तक जीवित रहे, कहता रहे : मैं किसी को नहीं छूता और न मुझे कोई छुए। इस प्रकार तू अछूत बनकर जिएगा। तथा क़ियामत के दिन तेरे लिए एक और वादा है, जिसमें तेरा हिसाब होगा और तुझे दंडित किया जाएगा। अल्लाह इस वादे को तुझसे कदापि न टालेगा। तू अपने उस बछड़े को देख, जिसे तूने अपना पूज्य बना रखा था और अल्लाह को छोड़कर तू उसकी पूजा कर रहा था। हम अवश्य ही उसपर आग दहकाएँगे, यहाँ तक कि वह पिघल जाए, फिर उसे समुद्र में उड़ा देंगे, ताकि उसका कोई निशान न रह जाए।
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