सूरह 20 · जुज़ 16

Ta-Ha · 20:77

وَلَقَدْ أَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِي فَاضْرِبْ لَهُمْ طَرِيقًا فِي الْبَحْرِ يَبَسًا لَا تَخَافُ دَرَكًا وَلَا تَخْشَىٰ

और हमने मूसी की ओर वह़्यी की कि रातों-रात चल पड़ मेरे भक्तों को लेकर और उनके लिए सागर में सूखा मार्ग बना ले[1], तुझे पा लिए जाने का कोई भय नहीं होगा और न डरेगा।
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1. इस का सविस्तार वर्णन सूरह शुअराः 26 में आ रहा है।

तफ़सीर

और हमने मूसा की ओर वह़्य (प्रकाशना) की कि मेरे बंदों को लेकर रातों रात मिस्र से रवाना हो जाओ, ताकि किसी को उनकी भनक न लगे तथा लाठी को समुद्र पर मारकर उनके लिए समुद्र में एक सूखा मार्ग बना लो। तुम्हें इस बात का डर न हो कि फ़िरऔन और उसके सरदार तुम्हें पकड़ लेंगे या तुम समुद्र में डूब जाओगे।

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