सूरह 20 · जुज़ 16
Ta-Ha · 20:73
إِنَّا آمَنَّا بِرَبِّنَا لِيَغْفِرَ لَنَا خَطَايَانَا وَمَا أَكْرَهْتَنَا عَلَيْهِ مِنَ السِّحْرِ ۗ وَاللَّهُ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ
हम तो अपने पालनहार पर ईमान लाये हैं, ताकि वह क्षमा कर दे, हमारे लिए, हमारे पापों को तथा जिस जादू पर तूने हमें बाध्य किया और अल्लाह सर्वोत्तम तथा अनन्त[1] है।
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1. और तेरा राज्य तथा जीवन तो साम्यिक है।
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1. और तेरा राज्य तथा जीवन तो साम्यिक है।
तफ़सीर
हम अपने रब पर इस आशा में ईमान लाए हैं कि वह हमसे कुफ़्र और अन्य चीजों के हमारे पिछले पापों को मिटा दे, तथा हमारे उस जादू के पाप को क्षमा कर दे, जिसे सीखने और अभ्यास करने तथा उसके द्वारा मूसा को परास्त करने के लिए तूने हमें मजबूर किया था। तथा अल्लाह उससे कहीं बेहतर प्रतिफल देने वाला है, जिसका तूने हमसे वादा किया है तथा उससे कहीं अधिक स्थायी यातना देने वाला है, जिसकी तूने हमें धमकी दी है।
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