सूरह 2 · जुज़ 1
Al-Baqarah · 2:32
قَالُوا سُبْحَانَكَ لَا عِلْمَ لَنَا إِلَّا مَا عَلَّمْتَنَا ۖ إِنَّكَ أَنْتَ الْعَلِيمُ الْحَكِيمُ
सबने कहाः तू पवित्र है। हम तो उतना ही जानते हैं, जितना तूने हमें सिखाया है। वास्तव में, तू अति ज्ञानी तत्वज्ञ[1] है।
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1. तत्वज्ञः अर्थात जो भेद तथा रहस्य को जानता हो।
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1. तत्वज्ञः अर्थात जो भेद तथा रहस्य को जानता हो।
तफ़सीर
उन्होंने - अपनी कमी को स्वीकार करते हुए, अल्लाह को श्रेय देते हुए - कहा : ऐ हमारे पालनहार! हम तेरे फ़ैसले और विधान के बारे में तुझपर आपत्ति करने से तुझे पवित्र ठहराते और तेरा महिमामंडन करते हैं। क्योंकि तूने हमें जो ज्ञान दिया है, उसके सिवा हम और कुछ नहीं जानते। निःसंदेह तू सर्वज्ञ है, जिससे कुछ भी छिपा नहीं है, तू पूर्ण हिकमत वाला है, अपनी नियति और अपने विधान में चीजों को उनके उचित स्थान पर रखता है।
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