सूरह 2 · जुज़ 3
Al-Baqarah · 2:263
۞ قَوْلٌ مَعْرُوفٌ وَمَغْفِرَةٌ خَيْرٌ مِنْ صَدَقَةٍ يَتْبَعُهَا أَذًى ۗ وَاللَّهُ غَنِيٌّ حَلِيمٌ
भली बात बोलना तथा क्षमा, उस दान से उत्तम है, जिसके पश्चात् दुःख दिया जाये तथा अल्लाह निस्पृह, सहनशील है।
तफ़सीर
एक अच्छी बात जिससे आप किसी ईमान वाले के दिल में खुशी ले आएँ, और जिस व्यक्ति ने आपके साथ दुर्व्यवहार किया है, क्षमा कर दें; यह उस दान से बेहतर है, जिसके बाद उस आदमी पर उपकार जताकर कष्ट दिया जाए, जिसपर दान किया गया है। और अल्लाह अपने बंदों से बहुत बेनियाज़, अत्यंत सहनशील है उन्हें दंड देने में जल्दी नहीं करता है।
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