सूरह 18 · जुज़ 16
Al-Kahf · 18:90
حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ مَطْلِعَ الشَّمْسِ وَجَدَهَا تَطْلُعُ عَلَىٰ قَوْمٍ لَمْ نَجْعَلْ لَهُمْ مِنْ دُونِهَا سِتْرًا
यहाँ तक कि सूर्य़ोदय के स्थान तक पहुँचा। तो उसे पाया कि ऐसी जाति पर उदय हो रहा है, जिससे हमने उनके लिए कोई आड़ नहीं बनायी है।
तफ़सीर
और वह चलता रहा, यहाँ तक कि जब वह (आँख की दृष्टि में) सूरज उगने की दिशा में पहुँच गया, तो उसने सूरज को ऐसे लोगों पर उगता हुआ पाया, जिनके लिए हमने सूर्य के ताप से बचने की कोई ओट, जैसे घर और पेड़ों की छाया नहीं बनाई थी।
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