सूरह 18 · जुज़ 16

Al-Kahf · 18:82

وَأَمَّا الْجِدَارُ فَكَانَ لِغُلَامَيْنِ يَتِيمَيْنِ فِي الْمَدِينَةِ وَكَانَ تَحْتَهُ كَنْزٌ لَهُمَا وَكَانَ أَبُوهُمَا صَالِحًا فَأَرَادَ رَبُّكَ أَنْ يَبْلُغَا أَشُدَّهُمَا وَيَسْتَخْرِجَا كَنْزَهُمَا رَحْمَةً مِنْ رَبِّكَ ۚ وَمَا فَعَلْتُهُ عَنْ أَمْرِي ۚ ذَٰلِكَ تَأْوِيلُ مَا لَمْ تَسْطِعْ عَلَيْهِ صَبْرًا

और रही दीवार, तो वह दो अनाथ बालकों की थी और उसके भीतर उनका कोष था और उनके माता-पिता पुनीत थे, तो तेरे पालनहार ने चाहा कि वे दोनों अपनी युवा अवस्था को पहुँचें और अपना कोष निकालें, तेरे पालनहार की दया से और मैंने ये अपने विचार तथा अधिकार से नहीं किया[1]। ये उसकी वास्तविक्ता है, जिसे तुम सहन नहीं कर सके।
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1. यह सभी कार्य विशेष रूप से निर्दोष बालक का वध धार्मिक नियम से उचित न था। इस लिये मूसा (अलैहिस्सलाम) इस को सहन न कर सके। किन्तु ((ख़िज़्र)) को विशेष ज्ञान दिया गया था जो मूसा (अलैहिस्सलाम) के पास नहीं था। इस प्रकार अल्लाह ने जता दिया कि हर ज्ञानी के ऊपर भी कोई ज्ञानी है।

तफ़सीर

और रही बात उस दीवार की, जिसकी मैंने मरम्मत की थी तथा आपने उसकी मरम्मत करने पर मेरा विरोध किया था, वह उस नगर के दो बालकों की थी, जिसमें हम आए थे : उनके पिता की मृत्यु हो चुकी थी और दीवार के नीचे उन दोनों के लिए धन गाड़ा हुआ था और इन दोनों बालकों का पिता नेक था। इसलिए (हे मूसा!) आपके पालनहार ने चाहा कि वे दोनों वयस्कता तक पहुँचें और बड़े हो जाएँ और दीवार के नीचे से अपने गड़े हुए धन को निकालें; क्योंकि यदि दीवार अभी गिर जाती, तो उनका धन प्रकट हो जाता और क्षति से ग्रस्त हो जाता। दरअसल, यह उपाय आपके पालनहार की ओर से उन दोनों पर एक दया थी। मैंने इसे अपने विवेक से नहीं किया था। यह है असल वास्तविकता उन घटनाओं की, जिनपर आप धैर्य नहीं रख सके।

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