सूरह 18 · जुज़ 15
Al-Kahf · 18:74
فَانْطَلَقَا حَتَّىٰ إِذَا لَقِيَا غُلَامًا فَقَتَلَهُ قَالَ أَقَتَلْتَ نَفْسًا زَكِيَّةً بِغَيْرِ نَفْسٍ لَقَدْ جِئْتَ شَيْئًا نُكْرًا
फिर दोनों चले, यहाँ तक कि एक बालक से मिले, तो उस (ख़िज़्र) ने उसे वध कर दिया। मूसा ने कहाः क्या आपने एक निर्दोष प्राण ले लिया, वह भी किसी प्राण के बदले[1] नहीं? आपने बहुत ही बुरा काम किया।
____________________
1. अर्थात उस ने किसी प्राणी को नहीं मारा कि उस के बदले में उसे मारा जाये।
____________________
1. अर्थात उस ने किसी प्राणी को नहीं मारा कि उस के बदले में उसे मारा जाये।
तफ़सीर
फिर नाव से उतरने के बाद, वे दोनो तट पर चलने लगे। तो उन्होंने एक बच्चे को, जो अभी बालिग नहीं हुआ था, अन्य बच्चों के साथ खेलते देखा। तो ख़ज़िर ने उसे मार डाला। इसपर मूसा अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : क्या आपने एक पवित्र (निर्दोष) जान को जो बालिग नहीं हुई थी, बिना किसी अपराध के क़त्ल कर दिया?! आपने एक बहुत ही बुरा काम किया है!
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें