सूरह 18 · जुज़ 15
Al-Kahf · 18:49
وَوُضِعَ الْكِتَابُ فَتَرَى الْمُجْرِمِينَ مُشْفِقِينَ مِمَّا فِيهِ وَيَقُولُونَ يَا وَيْلَتَنَا مَالِ هَٰذَا الْكِتَابِ لَا يُغَادِرُ صَغِيرَةً وَلَا كَبِيرَةً إِلَّا أَحْصَاهَا ۚ وَوَجَدُوا مَا عَمِلُوا حَاضِرًا ۗ وَلَا يَظْلِمُ رَبُّكَ أَحَدًا
और कर्म लेख[1] (सामने) रख दिये जायेंगे, तो आप अपराधियों को देखेंगे कि उससे डर रहे हैं, जो कुछ उसमें (अंकित) है तथा कहेंगे कि हाय हमारा विनाश! ये कैसी पुस्तक है, जिसने किसी छोटे और बड़े कर्म को नहीं छोड़ा है, परन्तु उसे अंकित कर रखा है? और जो कर्म उन्होंने किये हैं, उन्हें वह सामने पायेंगे और आपका पालनहार किसी पर अत्याचार नहीं करेगा।
____________________
1. अर्थात प्रत्येक का कर्म पत्र जो उस ने संसारिक जीवन में किया है।
____________________
1. अर्थात प्रत्येक का कर्म पत्र जो उस ने संसारिक जीवन में किया है।
तफ़सीर
और कर्मपत्र रख दिया जाएगा। तो कुछ लोग अपना कर्मपत्र अपने दाएँ हाथ में पकड़े होंगे और कुछ उसे अपने बाएँ हाथ में। और (ऐ इनसान) तुम काफिरों को देखोगे कि जो कुछ उसमें लिखा होगा, उससे डरे हुए होंगे। क्योंकि वे खूब जानते होंगे कि उन्होंने दुनिया में क्या कुफ़्र और पाप किए थे। और वे कहेंगे : हाय हमारा विनाश और हमारा दुर्भाग्य! इस पुस्तक को क्या हुआ है कि हमारे कर्मों में से कोई छोटा या बड़ा नहीं छोड़ा है, मगर उसे संरक्षित कर रखा है और गिन रखा है। और उन्होंने सांसारिक जीवन में जो पाप किए थे, उन्हें लिखा हुआ और अंकित पाएँगे। और (ऐ रसूल) आपका पालनहार किसी पर अत्याचार नहीं करेगा। चुनाँचे वह किसी को बिना पाप के दंड नहीं देगा और न किसी आज्ञाकारी व्यक्ति की नेकी में से कुछ कम करेगा।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें