सूरह 18 · जुज़ 15

Al-Kahf · 18:45

وَاضْرِبْ لَهُمْ مَثَلَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا كَمَاءٍ أَنْزَلْنَاهُ مِنَ السَّمَاءِ فَاخْتَلَطَ بِهِ نَبَاتُ الْأَرْضِ فَأَصْبَحَ هَشِيمًا تَذْرُوهُ الرِّيَاحُ ۗ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ مُقْتَدِرًا

और (हे नबी!) आप उन्हें सांसारिक जीवन का उदाहरण दें, उस जल से, जिसे हमने आकाश से बरसाया। फिर उसके कारण मिल गई धरती की उपज, फिर चूर हो गई, जिसे वायु उड़ाये फिरती[1] है और अल्लाह प्रत्येक चीज़ पर सामर्थ्य रखने वाला है।
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1. अर्थात संसारिक जीवन और उस का सुख-सुविधा सब साम्यिक है।

तफ़सीर

और (ऐ रसूल) दुनिया के धोखे में पड़े हुए लोगों को (सांसारिक जीवन का) एक उदाहरण दें। चुनाँचे दुनिया का उदाहरण उसके नष्ट होने और जल्दी समाप्त होने में, उस बारिश के पानी की तरह है, जिसे हमने आकाश से उतारा। फिर उस जल से धरती के पौधे उगे और पक गए। फिर वह पौधा टूटकर चूरा-चूरा बन गया। हवाएँ जिसके हिस्सों को अन्य क्षेत्रों में उड़ा ले जाती हैं। फिर धरती वापस वैसी ही हो जाती है जैसी पहले थी। और अल्लाह हर चीज़ का सामर्थ्य रखने वाला है। उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती। इसलिए वह जो चाहता है, जीवित रखता है और जो चाहता है, नष्ट कर देता है।

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