सूरह 18 · जुज़ 15
Al-Kahf · 18:36
وَمَا أَظُنُّ السَّاعَةَ قَائِمَةً وَلَئِنْ رُدِدْتُ إِلَىٰ رَبِّي لَأَجِدَنَّ خَيْرًا مِنْهَا مُنْقَلَبًا
और न ये समझता हूँ कि प्रलय होगी और यदि मुझे अपने पालनहार की ओर पुनः ले जाया गया, तो मैं अवश्य ही इससे उत्तम स्थान पाऊँगा।
तफ़सीर
मुझे नहीं लगता कि क़ियामत आने वाली है। बल्कि यह एक निरंतर जीवन है। और यह मानते हुए कि वह आ ही गई, तो जब मैं पुनर्जीवित किया जाऊँगा और अपने पालनहार की ओर लौटाया जाऊँगा, तो पुनर्जीवन के बाद मैं जिसकी ओर लौटूँगा उसे अपने इस बाग़ से उत्तम पाऊँगा। क्योंकि इस दुनया में मेरे समृद्ध होने की अपेक्षा यह है कि मैं पुनर्जीवन के बाद भी समृद्ध होऊँ।
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