सूरह 18 · जुज़ 15

Al-Kahf · 18:31

أُولَٰئِكَ لَهُمْ جَنَّاتُ عَدْنٍ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهِمُ الْأَنْهَارُ يُحَلَّوْنَ فِيهَا مِنْ أَسَاوِرَ مِنْ ذَهَبٍ وَيَلْبَسُونَ ثِيَابًا خُضْرًا مِنْ سُنْدُسٍ وَإِسْتَبْرَقٍ مُتَّكِئِينَ فِيهَا عَلَى الْأَرَائِكِ ۚ نِعْمَ الثَّوَابُ وَحَسُنَتْ مُرْتَفَقًا

यही हैं, जिनके लिए स्थायी स्वर्ग हैं, जिनमें नहरें प्रवाहित हैं, उसमें उन्हें सोने के कंगन पहनाये जायेंगे।[1] तथा (वे) महीन और गाढ़े रेशम के हरे वस्त्र पहनेंगे, उसमें सिंहासनों के ऊपर आसीन होंगे। ये क्या ही अच्छा प्रतिफल और क्या ही अच्छा विश्राम स्थान है।
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1. यह स्वर्ग वासियों का स्वर्ण कंगन है। किन्तु संसार में इस्लाम की शिक्षानुसार पुरुषों के लिये सोने का कंगन पहनना ह़राम है।

तफ़सीर

ईमान एवं अच्छे कार्य करने की विशेषताओं से विशिष्ट इन लोगों के लिए हमेशा के लिए निवास करने के लिए बगीचे हैं, उनके महलों के नीचे से स्वर्ग की मीठी नहरें बहती हैं। वे वहाँ सोने के कंगनों से सुशोभित किए जाएँगे तथा पतले और मोटे रेशम से बने हरे कपड़े पहनेंगे। वे सुंदर पर्दों से सजाए गए बिस्तरों पर टेक लगाए बैठे होंगे। उनका प्रतिफल बहुत अच्छा है और जन्नत उनके लिए निवास करने के लिए एक बेहतरीन घर और ठिकाना है।

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