सूरह 17 · जुज़ 15
Al-Isra · 17:98
ذَٰلِكَ جَزَاؤُهُمْ بِأَنَّهُمْ كَفَرُوا بِآيَاتِنَا وَقَالُوا أَإِذَا كُنَّا عِظَامًا وَرُفَاتًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ خَلْقًا جَدِيدًا
यही उनका प्रतिकार (बदला) है, इसलिए कि उन्होंने हमारी आयतों के साथ कुफ़्र किया और कहाः क्या जब हम अस्थियाँ और चूर-चूर हो जायेंगे, तो नई उत्पत्ति में पुणः जीवित किये जायेंगे[1]?
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1. अर्थात ऐसा होना संभव नहीं है कि जब हमारी हड्डियाँ सड़ गल जायें तो हम फिर उठाये जायेंगे।
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1. अर्थात ऐसा होना संभव नहीं है कि जब हमारी हड्डियाँ सड़ गल जायें तो हम फिर उठाये जायेंगे।
तफ़सीर
यह सज़ा जो उन्हें झेलनी पड़ेगी, यह उनका बदला है उनके हमारी अपने रसूल पर उतारी गई आयतों का इनकार करने और मरणोपरांत पुनर्जीवित होने को असंभव समझते हुए यह कहने के कारण कि : क्या जब हम मरकर सड़ी-गली हड्डियाँ और विचूर्ण टुकड़े हो जाएँगे, तो क्या हम नए सिरे से पैदा करके उठाए जाएँगे?
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