सूरह 17 · जुज़ 15
Al-Isra · 17:95
قُلْ لَوْ كَانَ فِي الْأَرْضِ مَلَائِكَةٌ يَمْشُونَ مُطْمَئِنِّينَ لَنَزَّلْنَا عَلَيْهِمْ مِنَ السَّمَاءِ مَلَكًا رَسُولًا
(हे नबी!) आप कह दें कि यदि धरती में फ़रिश्ते निश्चिन्त होकर चलते-फिरते होते, तो हम अवश्य उनपर आकाश से कोई फ़रिश्ता रसूल बनाकर उतारते।
तफ़सीर
(ऐ रसूल) आप उन्हें उत्तर देते हुए कहें : यदि धरती पर फ़रिश्ते बसते और तुम्हारी तरह शांति के साथ चलते-फिरते, तो हम अवश्य ही उनकी ओर उन्ही में से एक फ़रिश्ते को रसूल बनाकर भेजते। क्योंकि वही उन्हें अल्लाह का संदेश समझा पाता। इसलिए उनकी ओर मानव जाति में से रसूल भेजना हिकमत नहीं होती। बिल्कुल यही हाल तुम्हारा भी है।
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