सूरह 17 · जुज़ 15

Al-Isra · 17:85

وَيَسْأَلُونَكَ عَنِ الرُّوحِ ۖ قُلِ الرُّوحُ مِنْ أَمْرِ رَبِّي وَمَا أُوتِيتُمْ مِنَ الْعِلْمِ إِلَّا قَلِيلًا

(हे नबी!) लोग आपसे रूह़[1] के विषय में पूछते हैं, आप कह दें: रूह़ मेरे पालनहार के आदेश से है और तुम्हें जो ज्ञान दिया गया, वह बहुत थोड़ा है।
____________________
1. "रूह़" का अर्थ आत्मा है, जो हर प्राणी के जीवन का मूल है। किन्तु उस की वास्तविक्ता क्या है? यह कोई नहीं जानता। क्यों कि मनुष्य के पास जो ज्ञान है वह बहुत कम है।

तफ़सीर

(ऐ रसूल) अह्ले किताब में से काफ़िर लोग आपसे रूह़ (आत्मा) की वास्तविकता के बारे में प्रश्न करते हैं, तो आप उनसे कह दें : अल्लाह के अलावा रूह़ की हक़ीक़त को कोई नहीं जानता है। तथा तुम्हें और सारी सृष्टि को सर्वशक्तिमान अल्लाह के ज्ञान की तुलना में बहुत कम ज्ञान दिया गया है।

पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें

आपकी भाषा में तफ़सीर

अरबी तफ़सीरें

अनुवाद

सुनें